हे भगवान! क्या ख़ुशख़बरी है! आज सुबह अखबार पढ़ते हुए मेरी नज़र एक ख़बर पर पड़ी और मेरा दिल खुशी से भर गया। मुझे तुरंत अपने पड़ोस में रहने वाले मामा जी को यह बात बतानी थी, जो अक्सर अपने गाँव ट्रेन से जाया करते हैं। ख़बर यह है कि रेलवे ने बुजुर्ग यात्रियों के लिए दो बहुत बड़ी सुविधाएं दोबारा शुरू कर दी हैं। यह सुनकर मेरे मन में एक ख़ुशी की लहर दौड़ गई। क्योंकि हमारे बुजुर्ग, हमारे ताऊ-ताई, नाना-नानी, माता-पिता… इन सुविधाओं का इंतज़ार बहुत दिनों से कर रहे थे।
कोरोना काल के बाद से ये सुविधाएं बंद थीं, और इससे हमारे वरिष्ठ नागरिकों की यात्रा में काफी दिक्कतें आती थीं। लेकिन अब रेल मंत्रालय ने एक बहुत ही सराहनीय फैसला लिया है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि वे कौन सी दो बड़ी सुविधाएं हैं, जो बुजुर्गों के लिए वरदान साबित होंगी।
पहली बड़ी सुविधा: सीनियर सिटीजन के लिए टिकट पर मिलेगी विशेष छूट वापस!
हाँ, आपने सही पढ़ा! कोरोना महामारी के दौरान रोक दी गई सीनियर सिटीजन की टिकट छूट अब वापस आ गई है। इसका मतलब है:
- पुरुष यात्री जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें टिकट की कीमत पर 40% की छूट मिलेगी।
- महिला यात्री जिनकी आयु 58 वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें टिकट की कीमत पर 50% की छूट का लाभ मिलेगा।
कितनी बड़ी राहत की बात है! अब हमारे माता-पिता या रिश्तेदार बिना किसी आर्थिक चिंता के अपनी ज़रूरी यात्राएं कर सकेंगे। वैसे भी, इस उम्र में पेंशन और बचत पर गुज़ारा होता है, ऐसे में रेलवे की यह छूट एक तोहफे जैसी है। मुझे याद आता है कि मेरे नानाजी को जब भी छूट मिलती थी, वे बहुत खुश होते थे और कहते थे, “बेटा, सरकार को बुजुर्गों का ख्याल रखना चाहिए।” लगता है अब उनकी यह बात सच हो रही है।
दूसरी बड़ी सुविधा: लोअर बर्थ की आरक्षण सुविधा फिर से शुरू
ओफ्फो! इस खबर ने तो मेरा दिल जीत लिया। हम सभी जानते हैं कि उम्र के साथ शरीर में अकड़न, जोड़ों का दर्द और चढ़ने-उतरने की तकलीफें बढ़ जाती हैं। ऐसे में ट्रेन की ऊपरी बर्थ पर चढ़ना बुजुर्गों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता था।
अब डरने की ज़रूरत नहीं! रेलवे ने 60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष यात्रियों और 45 वर्ष से अधिक आयु की महिला यात्रियों के लिए लोअर बर्थ यानी निचली सीट आरक्षित करने की सुविधा फिर से शुरू कर दी है। अब वे आसानी से अपनी यात्रा का आनंद उठा सकेंगे। उन्हें ऊपर वाली बर्थ पर चढ़ने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। यह सुविधा न सिर्फ उनके शरीर के लिए आरामदायक है, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिहाज़ से भी बहुत ज़रूरी है। सच कहूँ तो, यह सुविधा मानवीय संवेदनाओं को दर्शाती है।
कैसे मिलेगा इन सुविधाओं का लाभ? कुछ ज़रूरी बातें:
- छूट का लाभ सिर्फ स्लीपर क्लास और सेकंड सिटिंग के टिकट पर ही मिलेगा। एसी कोच में यह छूट लागू नहीं होगी।
- छूट पाने के लिए आपको आयु का प्रमाण देना होगा। यात्रा के दौरान कोई भी वैध पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट) जिसमें जन्मतिथि हो, दिखाना ज़रूरी है।
- लोअर बर्थ बुक कराने के लिए आप ऑनलाइन आरक्षण करते समय इस विकल्प को चुन सकते हैं, या फिर रेलवे रिजर्वेशन काउंटर पर जाकर अपनी आयु का प्रमाण दिखाकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
आख़िर में, दिल से निकली बात…
सच कहूँ तो, यह फैसला सुनकर मेरे मन में रेलवे के प्रति सम्मान और बढ़ गया है। ऐसा लगता है जैसे सिस्टम में भी इंसानियत की जगह बची हुई है। हमारे बुजुर्गों ने अपना पूरा जीवन हमारे लिए समर्पित कर दिया। अब जब उनकी उम्र ढल गई है, तो यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि उनके जीवन को आसान और सुखद बनाएं। रेलवे की यह पहला एक छोटा, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण कदम है।
तो अगर आपके घर में भी कोई वरिष्ठ सदस्य हैं, जो अक्सर ट्रेन से यात्रा करते हैं, तो उन्हें यह खुशखबरी ज़रूर सुनाएँ। उनकी मुस्कुराहट देखकर आपका दिन भी खुशनुमा हो जाएगा। हमारे बुजुर्ग सुरक्षित, आरामदायक और खुशहाल यात्रा करें, यही कामना है।
आपका,
एक सामान्य यात्री जो बुजुर्गों का सम्मान करता है।









